सोमवार, 7 नवंबर 2016

छूटे न अबकी छठ के बरतिया | एक कविता बिहार से

गोबर से, मिट्टी से, लीपा हुआ घर-दुआर
नया धान, कूद फाँद, गुद-गुद टटका पुआर
छठ मने ठेकुआ, सिंघारा-मखाना
छठ मने शारदा सिन्हा जी का गाना

बच्चों की रजाई में भूत की कहानी
देर राह तक बतियाती माँ, मौसी, मामी
व्रत नहीं, छठ मने हमरे लिए तो
व्रत खोल पान खाके हँसती हुई नानी

छठ मने छुट्टी
छठ मने हुलास
छठ मने ननिहाल
आ रहा है पास


छठ महापर्व से हर बिहारवासी का एक गहरा जुड़ाव रहा है| लोकास्था का यह पर्व कुछ ऐसी ही यादें दे जाता है| इन्हीं यादों को शब्दों के माध्यम से सफलतापूर्वक चित्रित किया है बॉलीवुड के संजीदा गीतकारों में गिने जाने वाले युवा गीतकारराजशेखर ने| इन्होंने भी स्वीकार किया है कि “छठ मने शारदा सिन्हा जी का गाना”|
हाल ही में छठ पर्व की आस्था के साथ एक गीत रिलीज़ किया गया है| इसे गाया है मशहूर गायिका और बिहार की आवाज कही जाने वाली पद्मश्री से सम्मानित शारदा सिन्हा जी ने| इन्हीं के एल्बम से एक गीत आज आपके सामने आ रहा है जिसे लिखा है डॉ. शांति जैन ने| इस गीत का विषय आज के बाजारवाद में मुश्किल से उपलब्ध हो पाने वाली पूजा की सामग्री है| व्रती किस कदर डर जाते हैं जब उन्हें सामग्री नहीं मिल पाती और वो उस स्थिति में यही सोचते हैं कि जरूर उनसे कोई अपराध हुआ होगा जिसकी वजह से छठी माँ नाराज हैं और उन्हें पूजा की सामग्री भी नहीं मिल रही|
पटनाबीट्स के ‘एक कविता बिहार से’ में आज शामिल हो रहा है छठी माँ को समर्पित गीत- ‘सुपवो ना मिले’|

पटना सहरिया में सुपवो बुना ला हो
सुपवो ना मिले माई हे, कवन अवगुनवा|
रखिहऽ आसीस मईया, करीले जतनवा,
उगिहऽ सुरुज देव, हमरे अंगनवा|

सगरो बजरिया में गेंहुआ बिकाला हो
गेन्हुओं ना मिले माई हे, कवन अवगुनवा|

हाजीपुर सहरिया में केलवा बिकाला हो
केलवो ना मिले माई हे, कवन अवगुनवा|

बड़ा रे महात्तम छठी ओ बरतिया
मनसा पुरावेली सब छठी मईया
छूटे न अबकी छठ के बरतिया
छुट्टी लेके घरे अईह, करब परबीया| 

रखिहऽ आसीस मईया, करीले जतनवा,
उगीं ना सुरुज देव, हमरे अंगनवा|

शनिवार, 5 नवंबर 2016

बिहार के मुंगेर क्षेत्र में पुत्र प्राप्ति को लेकर माता सीता ने की थी छठ महापर्व की शुरुआत

त्योहारों और पर्वों के देश भारत में हर उत्सव को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. साल का ऐसा कोई महीना नहीं , जिसका अंत किसी बड़े व्रत और त्योहार के बिना गुज़र जाये. इन तीज-त्योहारों का सांस्कृतिक और भौगोलिक, दोनों रूपों में महत्त्व होता है. दीपावली के बाद आने वाला छठ पर्व का त्योहार भी कुछ इसी तरह का पर्व है. किसी समय केवल बिहार में मनाया जाने वाला यह पर्व आज बिहार के अलावा झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में भी बड़ी धूमधाम से मनाया जाने लगा है.

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कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को मनाये जाने वाले इस पर्व के पीछे समय के साथ होता सांस्कृतिक संक्रमण बड़ी वजह है. बिहार की बेटियां जहां-जहां शादियां करके गई, वहां-वहां वह इस त्योहार को श्रद्धा के साथ मनाने लगी और इस तरह से आज यह पर्व बिहार के पटना घाट से लेकर दिल्ली के यमुना घाट तक मनाया जाता है.

शुरुआती दौर


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छठ पूजा वास्तव में सूर्य की उपासना का पर्व है. सूर्य को ब्रह्मांड की उर्ज़ा का स्रोत भी कहा जाता है. ऋग्वेद में भी सूर्य उपासना के बारे में ज़िक्र किया गया है. ऋग्वेद के समय से चली आ रही छठ पूजा व्यवस्थित रूप से मध्यकाल में ज़्यादा प्रचलन में आई. सूर्य को शक्ति और ऊर्जा का देवता माना जाता है. मान्यता है कि छठ माता सूर्य भगवान की बहन है और इन्हीं को प्रसन्न करने के लिए सूर्य की आराधना जीवन के सबसे महत्वपूर्ण घटक जल में खड़े होकर की जाती है.

राम और सीता से जुड़ा है छठ पर्व का गहरा नाता


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बिहार के मुंगेर क्षेत्र में सबसे पहले माता सीता ने इस पर्व को महापर्व के रूप में मनाया था. भगवान श्री राम जब अपने पिता दशरथ के कहने पर वनवास के लिए निकले थे, तो माता सीता के मन में वनवास के दौरान आने वाले संकटों को लेकर काफ़ी शंकाएं थी.

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वनवास के प्रारम्भिक समय में प्रभु श्री राम, मां सीता के साथ मुद्गल ऋषि के आश्रम में पहुंचे. वहां मां सीता ने माता गंगा से वनवास का समय सकुशल बीत जाने को लेकर छठ माता की पूजा की थी.

पुत्र प्राप्ति और रामराज्य के लिए भी की थी सीता ने छठ माता की पूजा


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वनवास पूरा करने के बाद जब प्रभु राम अयोध्या वापस लौटे, तो उन्होंने रामराज्य के लिए राजसूय यज्ञ करने का निर्णय लिया. यज्ञ शुरू करने से पहले उन्हें वाल्मीकि ऋषि ने कहा कि मुद्गल ऋषि के आये बिना यह राजसूय यज्ञ सफ़ल नहीं हो सकता है.

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जब राम और सीता मुद्गल ऋषि को यज्ञ में आने का निमन्त्रण देने गये, तो मुद्गल ऋषि ने मां सीता को छठ का व्रत करने की सलाह दी. इस प्रकार मां सीता ने छठ माता से पुत्र प्राप्ति और रामराज्य की स्थापना के लिए कामना की.
विज्ञान में भी सूर्य को उर्ज़ा का स्रोत माना गया है और हमारे वेदों में भी कई बार सूर्य की महिमा का उल्लेख किया गया है. छठ पूजा के रूप में सूर्य उपासना करके साधक अपने अंदर एक ऊर्जावान शान्ति का भाव महसूस करता है. 

बुधवार, 2 नवंबर 2016

इस वजह से मनाया जाता है आस्था का महापर्व छठ

दिवाली से शुरू होकर नौ दिनों तक चलने वाले हिंदुओं के प्रमुखों त्योहारों में लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा का विशेष स्थान है। छठ पूजा उत्तर भारत में बेहद अहम त्योहार या पर्व है। चार दिनों तक होने वाले इस त्योहार को महापर्व भी कहते हैं। इस पर्व में भगवान सूर्य की उपासना और अर्घ्य देने का नियम है। इस बार छठ पूजा की तिथि चार नवंबर से लेकर सात नवंबर तक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पर्व को मनाने को लेकर 4 तरह की कहानियां प्रसिद्ध है।

छठ पूजा कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को मनाई जाती है। यह चार दिवसीय महापर्व है जो चौथ से सप्तमी तक मनाया जाता है। इसे कार्तिक छठ पूजा कहा जाता है। इसके अलावा चैत महीने में भई यह पर्व मनाया जाता है जिसे चैती छठ पूजा कहते हैं। पष्ठी के दिन माता छठी की पूजा की जाती हैं, जिन्हें धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उषआ (छठी मैया) कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार छठी मइया और भगवान सूर्य करीबी संबंधी हैं। इस पर्व के दौरान छठी मइया के अलावा भगवान सूर्य की पूजा-आराधना होती है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इन दोनों की अर्चना करता है उनकी संतानों की रक्षा छठी माता करती हैं।
पढ़िए इस महापर्व से जुड़ी 4 कहानियां
सूर्य की उपासना से हुई राजा प्रियवंद दंपति को संतान प्राप्ति
बहुत समय पहले की बात है राजा प्रियवंद और रानी मालिनी की कोई संतान नहीं थी। महर्षि कश्यप के निर्देश पर इस दंपति ने यज्ञ किया जिसके चलते उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई। दुर्भाग्य से यह उनका बच्चा मरा हुआ पैदा हुआ. इस घटना से विचलित राजा-रानी प्राण छोड़ने के लिए आतुर होने लगे। उसी समय भगवान की भगवान ब्रह्मा की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुईं। उन्होंने राजा से कहा कि क्योंकि वो सृष्टि की मूल प्रवृति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हैं इसी कारण वो षष्ठी कहलातीं हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होगी। राजा प्रियंवद और रानी मालती ने देवी षष्ठी की व्रत किया और उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई। कहते हैं ये पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को हुई थी। और तभी से छठ पूजा होती है।
अयोध्या लौटने पर भगवान राम ने किया था राजसूर्य यज्ञ
विजयादशमी के दिन लंकापति रावण के वध के बाद दिवाली के दिन भगवान राम अयोध्या पहुंचे। रावण वध के पाप से मुक्त होने के लिए भगवान राम ने ऋषि-मुनियों की सलाह से राजसूर्य यज्ञ किया। इस यज्ञ के लिए अयोध्या में मुग्दल ऋषि को आमंत्रित किया गया। मुग्दल ऋषि ने मां सीते को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्यदेव की उपासना करने का आदेश दिया। इसके बाद मां सीता मुग्दल ऋषि के आश्रम में रहकर छह दिनों तक सूर्यदेव भगवान की पूजा की थी।
जब कर्ण को मिला भगवान सूर्य से वरदान
छठ या सूर्य पूजा महाभारत काल से की जाती है। कहते हैं कि छठ पूजा की शुरुआत सूर्य पुत्र कर्ण ने की थी। कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे। मान्याताओं के अनुसार वे प्रतिदिन घंटों कमर तक पानी में खड़े रहकर सूर्य को अर्घ्‍य देते थे। सूर्य की कृपा से ही वे महान योद्धा बने थे।
राजपाठ वापसी के लिए द्रौपदी ने की थी छठ पूजा
इसके अलावा महाभारत काल में छठ पूजा का एक और वर्णन मिलता है। जब पांडव जुए में अपना सारा राजपाठ तब द्रौपदी ने छठ व्रत रखा था। इस व्रत से उनकी मनोकामना पूरी हुई थी और पांडवों को अपना राजपाठ वापस मिल गया था।

मंगलवार, 1 नवंबर 2016

ख़ुशख़बरी : यहाँ बनेगा बिहार का पहला साइबर सिटी!!!

पटना: बिहार सरकार ने पटना के मास्टर प्लान के अंतर्गत पुनपुन के डुमरी में साइबर सिटी बनाने का फैसला किया है। राज्य का यह पहला आइटी हब होगा। यह साइबर सिटी हैदराबाद के पास बनाई गई साइबराबाद की तर्ज पर विकसित किया जाएगा।यह साइबर सिटी एनएच 83 पर 17.6 वर्ग किमी क्षेत्र में बसाई जाएगी। पुनपुन में विकसित होने वाली सेटेलाइट सिटी के साथ जुड़ी होगी। साथ ही इसकी दोनों ओर दो-दो सेटेलाइट टाउनशिप भी बसाई जाएगी। इन चारों सेटेलाइट टाउनशिप से साइबर सिटी जुड़ी रहेगी।
साइबर सिटी कर फैलाव 17.6 वर्ग किलोमीटर में होगा। मास्टर प्लान में पुनपुन में विकसित की जाने वाली सेटेलाइट टाउनशिप 70 वर्ग किमी में रहेगी। इसमें आवासीय व व्यावसायिक तथा सार्वजनिक सुविधाएं भी रहेंगी।

सोमवार, 31 अक्टूबर 2016

अइले दिवाली लै के जोतिया के धार | एक कविता बिहार से




दिवाली आ गयी है| पटाखे और खिलौने ख़रीदे जा रहे हैं| लक्ष्मी-गणेश पूजन की तैयारियाँ चल रही हैं| समाज में भिन्न-भिन्न तबके के लोग हैं| कुछ लोग इस दिन जुआ खेलने का आनंद लेते हैं वहीं इसी समाज में कुछ ऐसे लोग भी हैं जिनके पास पूजा के लिए भी धन उपलब्ध नहीं है|
दिवाली में देवी लक्ष्मी की पूजा होती है| रौशनाई की जाती है| अँधेरे को जीता जाता है| खुशियाँ मनाई जाती हैं| खासकर यह जश्न का त्यौहार है| ऐसे में यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि आसपास कोई चेहरा उदासी में न हो| दीप हर किसी के आंगन पहुँचे तभी दिवाली सार्थक है|
किशनपुर बैकुंठ  की तरफ से दिवाली की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ ‘एक कविता बिहार से’ पर प्रस्तुत है एक अंगिका रचना| कवि हैं श्री बैकुंठ बिहारी| रचना के शब्द बहुत आसान हैं और भाव भी अत्यंत स्पष्ट है| दिवाली के विशेष अवसर पर हर झोपड़ी तक उजाला पहुँचाने के संदेश के साथ आई है आज की कविता- ‘अइले दिवाली लै के जोतिया के धार’|

अइले दिवाली लै के जोतिया के धार

अइले दिवाली लै के जोतिया के धार,
हमरी टुटली झोपड़िया में बसै छै अन्हार|

पेटवा जरै छै हमरो दिन आरो राती,
जरी-जरी हारी जाय छै दियरा के बाती|
कहाँ से सजैवै हमें दिया के कतार,
अइले दिवाली लै के जोतिया के धार|

चान सुरूज के डेरा हमरी झोपड़िया,
सगरे दुआर झलकै एक्को नै केबड़िया|
केना के अइत लछमी हमरो दुआर,
अइले दिवाली लै के जोतिया के धार|

कहियो ते लछमी फेरती नजरिया,
आँखो के जोत गेलै जोहतें डगरिया|
भेलै उमरिया चालिसो के पार,
अइले दिवाली लै के जोतिया के धार|

साथैं दलिदरा के बितलै उमरिया,
हेनो कि तोड़ली नै जाय नेह-डोरिया|
मिली-जुली रहबै की आबे दोनों यार,

अइले दिवाली लै के जोतिया के धार|

शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2016

पीएम मोदी की राह पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, बिहार में ला रहे हैं स्टार्टअप बिहार

​बिहार उद्यमी संघ (BEA) ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार छठ बाद ‘स्टार्ट अप बिहार’ योजना लांच करेंगे। ‘बिहार स्टार्ट अप पॉलिसी 2016’ बिहार उद्यमी संघ के सहयोग से बनाई गई है।
राज्य सरकार स्टार्टअप के जरिए युवाओं को बेहतरीन मौका दे रही है। इस योजना में भाषा बाधा न बने इसका ख्याल रखें। आज स्टार्टअप की बड़ी भूमिका है।
बिहार उद्यमी संघ के सचिव अभिषेक सिंह ने बताया कि यह योजना मुख्यमंत्री की पहल पर शुरु की गई है। जो जमीनी स्तर पर युवाओं के बीच काम करेगी। शुरुआती दौर में युवाओं को बिजनेस की शुरुआत करने के लिए सरकार फंड मुहैया कराएगी। सिंह ने कहा कि जिस दिन ‘स्टार्टअप बिहार’ की लाॉंचिंग होगी, उस दिन मुख्यमंत्री बीज खरीदने के लिए 10 लाख रुपये देंगे। उन्होंने कहा कि बिहार पहला ऐसा राज्य होगा, जो बीज खरीदने के लिए युवाओं को फंड मुहैया कराएगा। हालांकि, उद्योग विभाग के अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि योजना की शुरुआत, किस तारीख की होगी।
बिहार देश का पहला राज्य हैं जिसने स्टार्टअप योजना के लिए 500 करोड़ का कोष बनाया है। सोमवार से योजना के तहत आवेदन जमा किए जाएंगे। इसके लिए पोर्टल बनाया गया है। सर्च कमेटी आवेदनों को चुनेगी और इसे इंक्यूबेटर के पास भेजा जाएगा। चुने गए आइडिया पर काम करने के लिए सरकार फंड मुहैया कराएगी। विबरेज कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक मिथिलेश मिश्रा ने कहा कि दुनिया में आज तक कोई आइडिया फेल नहीं हुआ है।
शानदार बिजनेस आइडिया पर मिला सम्मान
उधर, बिहार उद्यमी संघ (बीईए) की ओर से ‘पिच 4 बिहार नामक कार्यक्रम का शुक्रवार को आयोजन किया गया। इसमें बेहतर बिजनेस और मोबाइल एप आइडिया देनेवालों को प्रोत्साहित किया। एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेन्द्र कुमार ने बताया कि नए आइडिया को प्रोत्साहित करने के लिए यह सबसे बड़ा कार्यक्रम है। 612 आवेदनों में से 25 को चुना गया। इनमें सबसे 6 बेहतरीन आइडिया देनेवाले पुरस्कृत किए गए। पुरस्कार वितरण सहकारिता मंत्री आलोक मेहता द्वारा किया गया।

गुरुवार, 27 अक्टूबर 2016

छतों पर लड़कियाँ | एक कविता बिहार से

अलोक धन्वा, हिंदी काव्य जगत में एक और बहुचर्चित और मीडिया में विवादित चेहरा| बिहार के मुंगेर जिले के बेलबिहमा में 1948 ई० में जन्में श्री धन्वा जी क्रांतिकारी कवितायेँ लिखने के लिए जाने जाते रहे हैं| सामाजिक और सांस्कृतिक आन्दोलनों से जुड़ जाने के बाद 14 वर्षों तक लेखन से दूर भी रहे| लेकिन जब वापस आये, हिंदी ने पुनः उसी प्रेम से गले लगाया|
एक कविता बिहार से” में आज PatnaBeats की तरफ से अलोक धन्वा की 1992 में लिखी हुई ऐसी ही एक क्रांतिकारी कविता- ‘छतों पर लड़कियाँ’|

छतों पर लड़कियाँ

अब भी
छतों पर आती हैं लड़कियाँ
मेरी ज़िंदगी पर पड़ती हैं उनकी परछाइयाँ।
गो कि लड़कियाँ आयी हैं उन लड़कों के लिए
जो नीचे गलियों में ताश खेल रहे हैं
नाले के ऊपर बनी सीढियों पर और
फ़ुटपाथ के खुले चायख़ानों की बेंचों पर
चाय पी रहे हैं
उस लड़के को घेर कर
जो बहुत मीठा बजा रहा है माउथ ऑर्गन पर
आवारा और श्री 420 की अमर धुनें।

पत्रिकाओं की एक ज़मीन पर बिछी दुकान
सामने खड़े-खड़े कुछ नौजवान अख़बार भी पढ़ रहे हैं।
उनमें सभी छात्र नहीं हैं
कुछ बेरोज़गार हैं और कुछ नौकरीपेशा,
और कुछ लफंगे भी

लेकिन उन सभी के ख़ून में
इंतज़ार है एक लड़की का !
उन्हें उम्मीद है उन घरों और उन छतों से
किसी शाम प्यार आयेगा !

मन की बात | अमन आकाश

थोरा सा शमय निकाल कर इसको परिए..😃 हाँ ठीक है हम बिहारी हैं.. बचपने से अइसे इस्कूल में पढ़े हैं, जहाँ बदमाशी करने पर माट साब "ठोठरी प...