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सोमवार, 31 अक्टूबर 2016

अइले दिवाली लै के जोतिया के धार | एक कविता बिहार से




दिवाली आ गयी है| पटाखे और खिलौने ख़रीदे जा रहे हैं| लक्ष्मी-गणेश पूजन की तैयारियाँ चल रही हैं| समाज में भिन्न-भिन्न तबके के लोग हैं| कुछ लोग इस दिन जुआ खेलने का आनंद लेते हैं वहीं इसी समाज में कुछ ऐसे लोग भी हैं जिनके पास पूजा के लिए भी धन उपलब्ध नहीं है|
दिवाली में देवी लक्ष्मी की पूजा होती है| रौशनाई की जाती है| अँधेरे को जीता जाता है| खुशियाँ मनाई जाती हैं| खासकर यह जश्न का त्यौहार है| ऐसे में यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि आसपास कोई चेहरा उदासी में न हो| दीप हर किसी के आंगन पहुँचे तभी दिवाली सार्थक है|
किशनपुर बैकुंठ  की तरफ से दिवाली की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ ‘एक कविता बिहार से’ पर प्रस्तुत है एक अंगिका रचना| कवि हैं श्री बैकुंठ बिहारी| रचना के शब्द बहुत आसान हैं और भाव भी अत्यंत स्पष्ट है| दिवाली के विशेष अवसर पर हर झोपड़ी तक उजाला पहुँचाने के संदेश के साथ आई है आज की कविता- ‘अइले दिवाली लै के जोतिया के धार’|

अइले दिवाली लै के जोतिया के धार

अइले दिवाली लै के जोतिया के धार,
हमरी टुटली झोपड़िया में बसै छै अन्हार|

पेटवा जरै छै हमरो दिन आरो राती,
जरी-जरी हारी जाय छै दियरा के बाती|
कहाँ से सजैवै हमें दिया के कतार,
अइले दिवाली लै के जोतिया के धार|

चान सुरूज के डेरा हमरी झोपड़िया,
सगरे दुआर झलकै एक्को नै केबड़िया|
केना के अइत लछमी हमरो दुआर,
अइले दिवाली लै के जोतिया के धार|

कहियो ते लछमी फेरती नजरिया,
आँखो के जोत गेलै जोहतें डगरिया|
भेलै उमरिया चालिसो के पार,
अइले दिवाली लै के जोतिया के धार|

साथैं दलिदरा के बितलै उमरिया,
हेनो कि तोड़ली नै जाय नेह-डोरिया|
मिली-जुली रहबै की आबे दोनों यार,

अइले दिवाली लै के जोतिया के धार|

गुरुवार, 31 मार्च 2016

मौसम का मिजाज :: आज के आज

अचानक मौसम का मिजाज बदल गया है । तेज आंधी के साथ बूंदा बांदी भी शुरू हो गयी है । दिन के साढ़े चार बजे ही अंधेरा छा गया हैं । मौसम का मिजाज देख कर उम्मीद की जा रही है की जोरदार बारिश होगी ।

शुक्रवार, 25 मार्च 2016

:: मेरा ग्राम धरोहर :: अस्पताल :: किशनपुर बैकुण्ठ

आज मैं आप सभी को किशनपुर बैकुण्ठ के अस्पताल और उसकी सुंदरता से परिचय करा रहा हूँ ।




लेख साभार :- सौरभ कुमार
चित्र :- रवि कुमार गिरी वं सौरभ कुमार
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:: परिचय :: किशनपुर बैकुण्ठ ::

किशनपुर बैकुण्ठ समस्तीपुर अन्तर्गत वारिसनगर के बसंतपुर रमणी पंचायत का सुंदर,स्वच्छ और शिक्षित गाँव है।

यह ब्लाॅग ऎक प्रयास है।इस गाँव की समस्या और विकास को आप सब के साथ सांझा करने केे लिऐ।

यह एक किरषी प्रधान गाँव यहाँ अब वैग्यानिक पध्दति से भी खेती की जाती है।

ईस गाँव की सुंदरता देखते ही बनती है साथ ही यहाँ के लोगो का विचार भी बहुत सुंदर है।यहाँ के लोग सुख-दुख में हमेशा साथ रहते है।


साभार :- सौरभ कुमार
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मन की बात | अमन आकाश

थोरा सा शमय निकाल कर इसको परिए..😃 हाँ ठीक है हम बिहारी हैं.. बचपने से अइसे इस्कूल में पढ़े हैं, जहाँ बदमाशी करने पर माट साब "ठोठरी प...