अलोक धन्वा, हिंदी काव्य जगत में एक और बहुचर्चित और मीडिया में विवादित चेहरा| बिहार के मुंगेर जिले के बेलबिहमा में 1948 ई० में जन्में श्री धन्वा जी क्रांतिकारी कवितायेँ लिखने के लिए जाने जाते रहे हैं| सामाजिक और सांस्कृतिक आन्दोलनों से जुड़ जाने के बाद 14 वर्षों तक लेखन से दूर भी रहे| लेकिन जब वापस आये, हिंदी ने पुनः उसी प्रेम से गले लगाया|
“एक कविता बिहार से” में आज PatnaBeats की तरफ से अलोक धन्वा की 1992 में लिखी हुई ऐसी ही एक क्रांतिकारी कविता- ‘छतों पर लड़कियाँ’|
“एक कविता बिहार से” में आज PatnaBeats की तरफ से अलोक धन्वा की 1992 में लिखी हुई ऐसी ही एक क्रांतिकारी कविता- ‘छतों पर लड़कियाँ’|
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