दिवाली में देवी लक्ष्मी की पूजा होती है| रौशनाई की जाती है| अँधेरे को जीता जाता है| खुशियाँ मनाई जाती हैं| खासकर यह जश्न का त्यौहार है| ऐसे में यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि आसपास कोई चेहरा उदासी में न हो| दीप हर किसी के आंगन पहुँचे तभी दिवाली सार्थक है|
सोमवार, 31 अक्टूबर 2016
अइले दिवाली लै के जोतिया के धार | एक कविता बिहार से
दिवाली में देवी लक्ष्मी की पूजा होती है| रौशनाई की जाती है| अँधेरे को जीता जाता है| खुशियाँ मनाई जाती हैं| खासकर यह जश्न का त्यौहार है| ऐसे में यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि आसपास कोई चेहरा उदासी में न हो| दीप हर किसी के आंगन पहुँचे तभी दिवाली सार्थक है|
अइले दिवाली लै के जोतिया के धार,
पेटवा जरै छै हमरो दिन आरो राती,
चान सुरूज के डेरा हमरी झोपड़िया,
कहियो ते लछमी फेरती नजरिया,
साथैं दलिदरा के बितलै उमरिया,
शुक्रवार, 29 अप्रैल 2016
बिहार के विरासत - 1 :: मुज्जफरपुर के लिची
आज हम आप के रुबरू करा रहे है मुज्जफरपुर के वर्ल्ड फेमस लिची से |
जी हा ये वही फल है जिसे देख कर अच्छे - अच्छो के मुह मे पानी आ जाता है मुज्जफरपुर के शाही लिची |
मुज्जफरपुर कि लिचीयो का लिची की दुनिया मे एक अलग हाइ जगह है मुज्जफर पुर के लिची और हाजीपुर के केले का फलो मे एक अलग ही जगह है अपने आप मे ये बिहार की विरासत है
जिसे देखकर किसी के भी मुह मे पानी आ जाता है | और बिहार मे कुछ नही ऐसा बोलने वालो का मुह बंद हो जाता है |
ये था बिहार की विरासत का पहला करी आपके लिये हम आगे भी लिखते रहेंगे बस आप शेयर और कमेंट करते रहे |
अगली करी मे पढीये हाजीपुर के केले के बारे मे बस तब तक जुरे रहिये हमारे साथ और लाइक करे हमारा फेसबुक पेज
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मन की बात | अमन आकाश
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