सोमवार, 31 अक्टूबर 2016

अइले दिवाली लै के जोतिया के धार | एक कविता बिहार से




दिवाली आ गयी है| पटाखे और खिलौने ख़रीदे जा रहे हैं| लक्ष्मी-गणेश पूजन की तैयारियाँ चल रही हैं| समाज में भिन्न-भिन्न तबके के लोग हैं| कुछ लोग इस दिन जुआ खेलने का आनंद लेते हैं वहीं इसी समाज में कुछ ऐसे लोग भी हैं जिनके पास पूजा के लिए भी धन उपलब्ध नहीं है|
दिवाली में देवी लक्ष्मी की पूजा होती है| रौशनाई की जाती है| अँधेरे को जीता जाता है| खुशियाँ मनाई जाती हैं| खासकर यह जश्न का त्यौहार है| ऐसे में यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि आसपास कोई चेहरा उदासी में न हो| दीप हर किसी के आंगन पहुँचे तभी दिवाली सार्थक है|
किशनपुर बैकुंठ  की तरफ से दिवाली की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ ‘एक कविता बिहार से’ पर प्रस्तुत है एक अंगिका रचना| कवि हैं श्री बैकुंठ बिहारी| रचना के शब्द बहुत आसान हैं और भाव भी अत्यंत स्पष्ट है| दिवाली के विशेष अवसर पर हर झोपड़ी तक उजाला पहुँचाने के संदेश के साथ आई है आज की कविता- ‘अइले दिवाली लै के जोतिया के धार’|

अइले दिवाली लै के जोतिया के धार

अइले दिवाली लै के जोतिया के धार,
हमरी टुटली झोपड़िया में बसै छै अन्हार|

पेटवा जरै छै हमरो दिन आरो राती,
जरी-जरी हारी जाय छै दियरा के बाती|
कहाँ से सजैवै हमें दिया के कतार,
अइले दिवाली लै के जोतिया के धार|

चान सुरूज के डेरा हमरी झोपड़िया,
सगरे दुआर झलकै एक्को नै केबड़िया|
केना के अइत लछमी हमरो दुआर,
अइले दिवाली लै के जोतिया के धार|

कहियो ते लछमी फेरती नजरिया,
आँखो के जोत गेलै जोहतें डगरिया|
भेलै उमरिया चालिसो के पार,
अइले दिवाली लै के जोतिया के धार|

साथैं दलिदरा के बितलै उमरिया,
हेनो कि तोड़ली नै जाय नेह-डोरिया|
मिली-जुली रहबै की आबे दोनों यार,

अइले दिवाली लै के जोतिया के धार|

शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2016

पीएम मोदी की राह पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, बिहार में ला रहे हैं स्टार्टअप बिहार

​बिहार उद्यमी संघ (BEA) ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार छठ बाद ‘स्टार्ट अप बिहार’ योजना लांच करेंगे। ‘बिहार स्टार्ट अप पॉलिसी 2016’ बिहार उद्यमी संघ के सहयोग से बनाई गई है।
राज्य सरकार स्टार्टअप के जरिए युवाओं को बेहतरीन मौका दे रही है। इस योजना में भाषा बाधा न बने इसका ख्याल रखें। आज स्टार्टअप की बड़ी भूमिका है।
बिहार उद्यमी संघ के सचिव अभिषेक सिंह ने बताया कि यह योजना मुख्यमंत्री की पहल पर शुरु की गई है। जो जमीनी स्तर पर युवाओं के बीच काम करेगी। शुरुआती दौर में युवाओं को बिजनेस की शुरुआत करने के लिए सरकार फंड मुहैया कराएगी। सिंह ने कहा कि जिस दिन ‘स्टार्टअप बिहार’ की लाॉंचिंग होगी, उस दिन मुख्यमंत्री बीज खरीदने के लिए 10 लाख रुपये देंगे। उन्होंने कहा कि बिहार पहला ऐसा राज्य होगा, जो बीज खरीदने के लिए युवाओं को फंड मुहैया कराएगा। हालांकि, उद्योग विभाग के अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि योजना की शुरुआत, किस तारीख की होगी।
बिहार देश का पहला राज्य हैं जिसने स्टार्टअप योजना के लिए 500 करोड़ का कोष बनाया है। सोमवार से योजना के तहत आवेदन जमा किए जाएंगे। इसके लिए पोर्टल बनाया गया है। सर्च कमेटी आवेदनों को चुनेगी और इसे इंक्यूबेटर के पास भेजा जाएगा। चुने गए आइडिया पर काम करने के लिए सरकार फंड मुहैया कराएगी। विबरेज कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक मिथिलेश मिश्रा ने कहा कि दुनिया में आज तक कोई आइडिया फेल नहीं हुआ है।
शानदार बिजनेस आइडिया पर मिला सम्मान
उधर, बिहार उद्यमी संघ (बीईए) की ओर से ‘पिच 4 बिहार नामक कार्यक्रम का शुक्रवार को आयोजन किया गया। इसमें बेहतर बिजनेस और मोबाइल एप आइडिया देनेवालों को प्रोत्साहित किया। एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेन्द्र कुमार ने बताया कि नए आइडिया को प्रोत्साहित करने के लिए यह सबसे बड़ा कार्यक्रम है। 612 आवेदनों में से 25 को चुना गया। इनमें सबसे 6 बेहतरीन आइडिया देनेवाले पुरस्कृत किए गए। पुरस्कार वितरण सहकारिता मंत्री आलोक मेहता द्वारा किया गया।

गुरुवार, 27 अक्टूबर 2016

छतों पर लड़कियाँ | एक कविता बिहार से

अलोक धन्वा, हिंदी काव्य जगत में एक और बहुचर्चित और मीडिया में विवादित चेहरा| बिहार के मुंगेर जिले के बेलबिहमा में 1948 ई० में जन्में श्री धन्वा जी क्रांतिकारी कवितायेँ लिखने के लिए जाने जाते रहे हैं| सामाजिक और सांस्कृतिक आन्दोलनों से जुड़ जाने के बाद 14 वर्षों तक लेखन से दूर भी रहे| लेकिन जब वापस आये, हिंदी ने पुनः उसी प्रेम से गले लगाया|
एक कविता बिहार से” में आज PatnaBeats की तरफ से अलोक धन्वा की 1992 में लिखी हुई ऐसी ही एक क्रांतिकारी कविता- ‘छतों पर लड़कियाँ’|

छतों पर लड़कियाँ

अब भी
छतों पर आती हैं लड़कियाँ
मेरी ज़िंदगी पर पड़ती हैं उनकी परछाइयाँ।
गो कि लड़कियाँ आयी हैं उन लड़कों के लिए
जो नीचे गलियों में ताश खेल रहे हैं
नाले के ऊपर बनी सीढियों पर और
फ़ुटपाथ के खुले चायख़ानों की बेंचों पर
चाय पी रहे हैं
उस लड़के को घेर कर
जो बहुत मीठा बजा रहा है माउथ ऑर्गन पर
आवारा और श्री 420 की अमर धुनें।

पत्रिकाओं की एक ज़मीन पर बिछी दुकान
सामने खड़े-खड़े कुछ नौजवान अख़बार भी पढ़ रहे हैं।
उनमें सभी छात्र नहीं हैं
कुछ बेरोज़गार हैं और कुछ नौकरीपेशा,
और कुछ लफंगे भी

लेकिन उन सभी के ख़ून में
इंतज़ार है एक लड़की का !
उन्हें उम्मीद है उन घरों और उन छतों से
किसी शाम प्यार आयेगा !

श्क़े के सदमे उठाने नहीं आसाँ ‘हसरत’ | एक कविता बिहार से

सीना तो ढूँढ लिया मुत्तसिल अपना हम ने,
नहीं मालूम दिया किस को दिल अपना हम ने|

दर ग़रीबी न था कुछ और मयस्सर ‘हसरत’,
इश्‍क़ की नज्र किया दीन ओ दिल अपना हम ने|

“दौर कोई भी हो, इश्क़ की तासीर वही होती है”, नज्में इस बात का पुख्ता सबूत है| पुराने शायरों-कवियों ने जिस शिद्दत से लफ़्ज़ों को पिरोया है, वो ग़ज़ल का भाव और बढ़ा देते हैं| इसी सिलसिले में आज के शायर का ज़िक्र भी आता है| इनकी रचनाएँ यथार्थ के करीब हैं, तभी तो ये तब से लेकर अब तक उसी भाव से पढ़े जाते हैं| बात पुराने शायरों में से एक ‘हसरत’ अज़ीमाबादी की हो रही है| ये 1885 में बिहार के अज़ीमाबाद में जन्मे|
पटनाबीट्स के ‘एक कविता बिहार से’ की आज की प्रस्तुति में शामिल हो रही है ‘हसरत’ अज़ीमाबादी की ग़ज़ल- ‘कब तलक हमको न आवेगा नज़र देखें तो’|

कब तलक हमको न आवेगा नज़र देखें तो


कब तलक हमको न आवेगा नज़र देखें तो,
कैसे तरसाता है ये दीदा-ए-तर देखें तो|

इश्‍क़ में उसके कि गुज़रे हैं सर ओ जान से हम,
अपनी किस तौर से हाती है गुज़र देखें तो|

कर के वो जौर ओ सितम हँस के लगा ये कहने,
आह ओ अफ़्गाँ का तिरी हम भी असर देखें तो|

सब्र हो सकता है कब हम से वले मसलेहतन,
आज़माइश दिल-ए-बेताब की कर देखें तो|

ढब चढ़े हो मिरे तुम आज ही तो मुद्दत बाद,
जाएँगे आप कहाँ और किधर देखें तो|

किस दिलेरी से करे है तू फ़िदा जान उस पर,
दिल-ए-जाँ-बाज़ तिरा हम भी हुनर देखें तो|

क्या मजाल अपनी जो कुछ कह सकें हम तुझ से और,
तुझ को भर कर नज़र ऐ शोख़ पिसर देखें तो|

हो चलीं ख़ीरा तो अख़तर-शुमरी से आँखे,
शब हमारी भी कभी होगी सहर देखें तो|

इश्‍क़ के सदमे उठाने नहीं आसाँ ‘हसरत’,
कर सके कोई हमारा सा जिगर देखें तो|

सोमवार, 24 अक्टूबर 2016

छठ विशेष | इस महीने बिहार में पटना, दरभंगा और सहरसा के लिए विशेष ट्रेन।

Northern Railway to press special trains for Bihar to clear ‘Chhat’ rush

Representational ima
ge
Northen Railways
The Anand Vihar-Patna-Anand Vihar Jansadharan ExpressSpecial, Anand Vihar-Saharsa-Anand Vihar Jansadharan Express, Anand Vihar-Jay Nagar-Anand Vihar Jansadharan Express and Sirhind-Saharsa-Ambala unreserved Express will be pressed into service to clear the ‘Chhat’ rush.
 A superfast express train Anand Vihar-Darbhanga-Anand Vihar will also be operational to clear the extra passengers during the festival period, the Northern Railway said in a statement today.
The Anand Vihar-Darbhanga superfast bi-weekly Express Special train will depart from Anand Vihar from October 19 till December 12 on every Wednesday and Saturday at 1.45 PM to reach Darbhanga at 8 AM the next day. In the return direction, the train will depart from Darbhanga from October 20 till November 13 on every Thursday and Sunday at 3.15 PM to reach Anand Vihar at 11.50 AM the next day. Comprising two AC-II coaches, three AC-III coaches, 16 sleeper class and two second class-cum-luggage van coaches, the train will halt at Kanpur, Allahabad, Mughalsarai, Patna and Samastipur stations en route in both thedirections.
The Anand Vihar-Patna Jansadharan Express Special train will depart from Anand Vihar on October 20, 22, 24, 27, 29, 31 and on November 3, 5 and 7 at 11 PM to reach Patna at 2 PM the next day. In the return direction, it will depart from Patna on October 21, 23, 25, 28, 30, November 1, 4, 6 and 8 at 4 PM to reach Anand Vihar at 7 AM the next day. With 16 general class and two second class-cum-luggage van coaches, the train will halt at Kanpur, Allahabad and Mughalsarai stations en route in both the directions.
The Anand Vihar-Saharsa Jansadharan Express Special train will depart from Anand Vihar on October 21, 28 and November 4 at 11 PM to reach Saharsa at 9 PM the next day. In the return direction, it will depart from Saharsa on October 24, 31 and November 7 at 8.30 AM to reach Anand Vihar at 7 AM the next day, the statement said. With 16 general class and two second class-cum-luggage vancoaches, the train is scheduled for halt at Kanpur, Allahabad, Mughalsarai, Patna, Barauni, Begusarai and Khagaria stations en route in both thedirections.The Anand Vihar-Jay Nagar Jansadharan Express Special will depart from Anand Vihar on October 19, 23, 26, 30, November 2, 6 and 9 at 11 PM to reach Jay Nagar at 9 PM the next day.In the return direction, it will depart from Jay Nagar on October 22, 26, 29 and November 2, 5, 9 and 12 at 9.30 AM to reach Anand Vihar at 7 AM the next day, it added. With 16 general class and two second class-cum-luggage van coaches, the train will halt at Kanpur, Allahabad, Mughalsarai, Patna, Barauni, Samastipur and Darbhanga stations en route in both the directions.
Another train pressed into service during the festive season — the Sirhind-Saharsa ExpressSpecial (unreserved) — will run between Sirhind, Saharasa and Ambala Cantt railway stations on a weekly basis. With 16 general class and two second class-cum-luggage van coaches, it stop at Rajpura, Ambala Cantt, Kurukshetra, Karnal, Panipat, Sonipat, Narela, Old Delhi, Kanpur, Allahabad, Mughalsarai, Patna, Barauni, Begusarai and Khagaria stations, according to the statement.

से दुःख तेरे देश इतने निंदिया न आये रे | एक कविता बिहार से

यह सच है, बॉलीवुड का एक युग संगीतकारों और गीतकारों के नाम रहा है| यह भी उतना ही सच है कि नये युग के गीत की तुलना हमेशा पुराने युग से की जाती रही है| नये कलमकारों में बहुत कम ऐसे हैं जिनकी कलम में प्राकृतिक निकटता, मधुरता और सच्चाई की झलक तो है ही साथ ही प्रसिद्धि की चमक भी है|
एक अरसे बाद कोई फिल्म आती है, देसी कहानी के साथ| कब इसके गाने लोगों की प्लेलिस्ट से निकल कर जुबान पर चढ़ जाते हैं, किसी को खबर नहीं होती| खबर किसी को इस बात की भी नहीं लगती कि इन गानों का संगीत जितना खुबसूरत था, उतनी की खूबसूरती से इनके शब्दों को भी पिरोया गया था| हाँ, खबर इसकी भी नहीं लगी कि ये शब्द पिरोने वाला शख्स बिहार से है|
जी! हम बात कर रहे हैं, तनु वेड्स मनु, तनु वेड्स मनु रिटर्न्स और ऊँगा जैसी फिल्मों में गीतकार की भूमिका अदा करने वाले कवि राज शेखर की| श्री शेखर जी बिहार के मधेपुरा जिले से हैं| 22 सितम्बर 1980 ई० को जन्में राजशेखर जी की शिक्षा-दीक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से हुई| इनकी लेखनी में सीधे-सादे देसी शब्दों की महक है और प्राकृतिक सौन्दर्य का रस भी| राज जी खुद भी कहते हैं, “जब गाँव जाता हूँ, वहाँ से कुछ शब्द उठा लाता हूँ”| ‘कितनी दफे दिल ने कहा’ हो, ‘रंगरेज मेरे’ या फिर ‘घनी बावरी’ हर गाने में सीधी और सच्ची बात|
तो पटनाबीट्स के ‘एक कविता बिहार से’ से आज जुड़ रहे हैं कवि राजशेखर अपनी एक कविता ‘जंतर-मंतर पे लोरी’ के साथ, जो उन्होंने जंतर-मंतर पर हक की लड़ाई लड़ने वालों की नींद के नाम की है| मगर उससे पहले, नियमगिरि पर्वत के लिए लिखी गयी इनकी एक मशहूर कविता ‘नियमराजा’ से कुछ अंश पेश है|

“हो देव! हो देव!

बस एक बात रहे,

नियमगिरि साथ रहे,

जंगल के माथे पे

उसके दोनों हाथ रहे|

टेसू-पलाश फूले,

लाले-लाले लहर-लहर,

मांदल पर थाप पड़े,

धिनिक-धिनिक, थपड-थपड|

दिमसा का नाच चले,

तनिक-तनिक संवर-संवर,

गाँव-गाँव-गाँव रहे,

दूर रहे शहर-शहर|

वर्दी वाले भाई,

तुम आना इधर,

ठहर-ठहर-ठहर-ठहर|

माटी के कुइया-मुइया

जंगल के हइया-हुइया

कुइया-मुइया, हइया-हुइया

कुइया-मुइया हम|”

जंतर-मंतर पे लोरी

जुलुम तेरा हाय रे,

बढ़ता ही जाए रे,

दुःख तेरे देश इतने

निंदिया न आये रे|

भूखे-भूखे पेट अपने,

निंदिया न आये रे|

दरद से ये देह टूटे

निंदिया न आये रे|

इस तकलीफदेह रात का अँधेरा,

ये शोरोगुल, ये उदासियाँ,

तुम्हारे पीठ पर के नील,

कहो तो इसे साझा कर लें?

और अब सो जाओ थोड़ी देर|

एहसान क्या!

जब फूटेगा भोर,

जब बदलेंगे दिन,

वो भी बाँट लेंगे,

तब कर लेंगे न हिसाब,

सोने-जागने का|

भारी बूटों की धमक से,

झूठे वादों की चमक से,

मजलूमों की कसक से,

निंदिया न आये रे|

खेतों से उठती महक ये,

चाँद-तारे और धमक ये,

सूरज भी कहता फलक से,

अब तो सो जा रे|

अब सो जा साथी रे|

दिनकर डूबता है तो उगता भी तो है हर रोज | एक कविता बिहार से

शुभकामना संदेश के साथ अपनी रचना हमें सौंपी है सुजाता प्रसाद जी ने| महिलाओं के साथ अच्छी बात यह होती है कि इनके दो-दो घर हो सकते हैं| इसी तर्ज़ पर श्रीमती सुजाता जी का भी मायका दरभंगा, बिहार में है और ससुराल बीरगंज, नेपाल में| दिल्ली में निवासित हैं और पेशे से शिक्षिका हैं| 15 सितम्बर 1973 ई० में जन्मीं सुजाता जी स्वतंत्र लेखन कर अपनी पहचान स्थापित कर रही हैं|
पटनाबीट्स के ‘एक कविता बिहार से’ में आज शामिल हो रही है कवयित्री सुजाता प्रसाद जी की कविता- ‘उम्मीदों के पायदान’|

उम्मीदों के पायदान

किसके हाथ आया है हर्ष 
किए बिना कोई संघर्ष, 
गर्दिश के ये पल भी जाएंगे 
सुखद छाया के वृक्ष भी लहराएंगे। 
सफ़र की हर एक चुनौती 
श्याम सियाही होती है, 
पल पल साथ चलती कठिनाई 
मेहनत की रायशुमारी होती है।

तू सहमता क्यों है, यह सच है 
वक्त ठहरता कब है? 
बुरा दौर भी खिसकेगा 
लिखित यही कहानी होती है।।

हर सपने में छुपी 
एक सच्चाई होती है, 
उम्मीदों के पायदानों की 
नित नई चढ़ाई होती है। 
दिनकर डूबता है तो 
उगता भी तो है हर रोज, 
गिर-गिर कर उठने वालों की 
सुबह सुहानी होती है।।

शनिवार, 22 अक्टूबर 2016

बिहार के इस बेटी और प्रसिद्ध कवियित्री के मन में बसल बा बिहार !

हाँ ये वही दिन है २१ अक्टूबर 
1992 जिन दिन शाम  को शशि भूषण मिश्रा  जी  के परिवार और जिंदगी में ऐसे  मिठास  बढ़ गया की मानो वक़्त ने यूँ मुठी भर के मिश्री ही  घोल गया हो ! कुछ दिन में नन्ही  से गुडिया का नाम “नेहा” रखा  गया  !


नेहा फिर बढ़ने लगी , प्रतिभाये खिलने लगी , ओज दिन दिखने लगा , जोश बढ़ने  लगा , शोर मचने  लगा ! हाँ स्कूल से कॉलेज हर तरफ  नेहा  अपने बेहतरीन और सबसे अलग बेहतर सकारात्मक कार्य में ऐसे  संलग्न किया आगे बढाया की ये बचपन में कैमूर  की पहाड़ो  हरियाली में बिहार की ये बेटी की जिंदगी शानदार संतुलित कॉकटेल सा बनता गया ! पहाड़ की तरह अंदर दृढ़ निश्चय , यूँ ऊँचा स्वाभिमान, लक्ष्य के प्रति पत्थर सा अडिग विचार ! लेकिन फिर दूसरी तरफ देखें तो वो ठंढी शीतल हवा और वादियों वाला सुहाना मन , मतवालापन ! नदियों की तरह बस आगे बढ़ना है , बढ़ते रहना है , अपनी मन की करनी है , अच्छा से से भी अच्छी बननी है !
अब ऐसा कुछ पढ़ के लग रहा होगा की कहीं ज्यादा तो नहीं हो गया ! बिलकुल नहीं साहेब, आगे कारनामे और भी हैं !

जैसा चरित्र वैसे पढाई ये कंप्यूटर साइंस से स्नातक करने लगी , और साथ  में शायरी , कविताये भी लिखने लगी, कला के क्षेत्र में भी बराबर रूचि ! निर्मल स्वाभाव के ब्राह्मण परिवार की ये बिटिया कभी आपको अपने निर्मलता से , तो कभी निश्छलता से , तो कभी विषय वस्तु की  जानकारी से , तो कभी अपनी मधुर कविता से जीत लेगी ! जिससे भी मिलती है दीवाना करती ये मंद ठंढी हवा के झोके की तरह बहती रहती है !
कहा था न नदियाँ बात कहाँ मानती है , सीमा कहाँ तय कर पाती है , दायरा यहाँ भी नहीं है ! इन्होने अपने कविता संग्रह बनाई , किताब लिखी एक नाम “जीवन के नुपुर” — निपुण लेखिका “नेहा नुपुर” ! आप भी पढ़ के अवगत हो  सकते हैं , अब तो ये online भी उपलब्ध है Amazon पे
http://www.amazon.in/Jeevan-Ke-Nupur-Hasin-Surile/dp/1618133098
और ये प्रकृति से जुडा हुआ प्रकृति वाला इंसान बच्चो से कहाँ दूर रह पाता है , खुद को दूर नहीं रख पाता है ! इसलिए ये सरकारी स्कूल में शिक्षिका बन के जिंदगी को और खुशनुमा कर रही हैं , और अपने जैसे और बेहतर कई जिंदगी बना रही हैं ! ज्ञात हो कि बिहार की वह बटी नेहा नूपुर ही है जिसने बिहार को बदनाम करने वालों और बिहार में जंगलराज कहने वालों को खुला पत्र लिख, अपने तर्क और शब्दों के वाण से सबकी बोलती बंद करा दी थी।
अपने मातृभूमि और बिहार के लिए इनका प्रेम, बिहार पर इनके द्वारा लिखे गये एक प्रसिद्ध कविता से झलकता है।
गाँव-घर से मिलल संस्कार कहाँ जाई,
मनवा में बसल ई बिहार कहाँ जाई|

दुई-चार दिन तनी घरहूँ बितईहऽ,
इहवाँ के खुसबू पूरा देस में फइलइहऽ|
माटी के दीहल अधिकार कहाँ जाई,
मनवा में बसल ई बिहार कहाँ जाई|

जाई के बिदेस, देस के बोली जनि भुलइहऽ,
लईकन के माई-बाबू कहे के सिखइहऽ|
जरि जाई देंहिया बाकिर बेवहार कहाँ जाई,
मनवा में बसल ई बिहार कहाँ जाई|

गंगा के घाट, गुल्ली-डंटा के खेला,
हर साल लागे इंहा सोनपुर मेला|
एह सभ में रमल तोहार पेयार कहाँ जाई,
मनवा में बसल ई बिहार कहाँ जाई|

सिंगापूर-अमेरिका में छठी माई के पूजन,
एके साथे होखे कुआरे पितरि अरपन|
एहिजा के तीज-त्योहार कहाँ जाई,
मनवा में बसल ई बिहार कहाँ जाई|

नस-नस में रसल बिचार कहाँ जाई,
मनवा में बसल ई बिहार कहाँ जाई||

रविवार, 16 अक्टूबर 2016

खुशखबरी: मिथिलांचल के इन जिलों में बिछेगा सड़कों का जाल, क्षेत्र के विकास को लगेंगे पंख

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मिथिलांचल के पांच जिलों में सड़कों का जाल बिछाया जायेगा. मधुबनी, दरभंगा, सुपौल, सहरसा और समस्तीपुर होते हुए राजधानी पहुंचने वाली सड़कों को 10 मीटर तक विस्तार किया जायेगा. सड़क, परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने मिथिलांचल के तीन सड़कों का विस्तार करने के लिए निर्णय लिया है. मंत्रालय ने एनएच 327 ए का विस्तार करने के लिए स्वीकृति दी है. सुपौल जिले के सरायगढ़, लालगंज व गनपतगंज सड़क का विस्तार होगा.
रोसड़ा से बहेड़ी, बहेड़ा, होते हुए यह सड़क मधुबनी जिले से जुड़ेगी. मधुबनी जिले के उच्चैठ भगवती स्थान बासोपट्टी से बेनीपट्टी, रहिका, मधुबनी, रामपट्टी, अवाम, लोफा, भेजा को सहरसा जिले के महिषी, तारा स्थान, बनगांव, बरियाही व सहरसा से जोड़ा जायेगा. मिथिलांचल के 90 किलोमीटर सड़क को दस मीटर चौड़ा किया जायेगा. सड़क का निर्माण ईपीसी मोड में होगा. वर्तमान में यह सड़क कहीं साढ़े तीन, साढ़े पांच व सात मीटर चौड़ी है. सड़क विस्तार होने से दरभंगा व सहरसा के बीच दूरी कम होने के साथ मिथिलांचल के तीन जिले मधुबनी, सुपौल व सहरसा में आवागमन में सहूलियत होगी. मंत्रालय ने स्टेट हाइवे को नेशनल हाइवे में सैद्धांतिक स्वीकृति दी है. इसके बाद उसका डीपीआर तैयार कराया जा रहा है. इसके लिए कंसलटेंट बहाल होगा. जानकारों के अनुसार अगले साल मार्च तक सड़क का डीपीआर तैयार होगा. इसके बाद सड़क के दस मीटर चौड़ा होने के निर्माण को लेकर टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी. सड़क का विस्तार होने से अन्य सड़कों के साथ कनेक्टिविटी बढ़ेगी. सड़क का विस्तार होने से लोगों की सुविधा बढ़ेगी. वहीं रोजगार के साथ व्यापार भी बढ़ेगा साथ ही सड़क का विस्तार होने से मिथिलांचल क्षेत्र की कनेक्टिविटी अन्य जगहों के साथ बढ़ेगी. मिथिलांचल में अभी मुख्य सड़क एनएच 57 फोर लेन है. दरभंगा, मधुबनी, सुपौल होते हुए फोर लेन पूर्णिया तक जाती है. सड़क का विस्तार होने से एनएच 106 बीरपुर से बीहपुर के अलावा एनएच 107 महेशखूंट से पूर्णिया से कनेक्टिविटी बढ़ेगी. दरभंगा से सहरसा की दूरी लगभग 60 किलोमीटर कम होगी. इसके साथ ही एनएच 28 में ताजपुर-बख्तियारपुर पुल निर्माण होने पर दक्षिण बिहार आने में सुविधा बढ़ेगी.

बड़ सुख सार पाओल तुअ तीरे | एक कविता बिहार से


माँ तेरी निर्मलता की दरकार तो है कब तक टालेंगे, कि सरकार तो है!
माँ गंगा की पवित्रता आज भी हर धर्म के लिए पूजनीय है, लेकिन निर्मलता के नाम पर अभी मेरे जेहन में यही पंक्ति बनकर आई| गंगा माँ की स्तुति की बात हो और महाकवि विद्यापति की बात न हो, ऐसा बिहार में होना मुमकिन नहीं| जनश्रुति की मानें तो विद्यापति की यह स्तुति माँ गंगे ने स्वीकार भी की थी और उनके अंतिम समय में उन्हें दर्शन भी दिए थे| तो आईये आज “एक कविता बिहार से” में पढ़ते हैं लोक जीवन के गायक, बिहार के दरभंगा जिले में 1360 ई० में जन्में, मैथिल कोकिल के नाम से सुप्रसिद्ध रससिद्ध कवि विद्यापति की गंगा-स्तुति| हर-हर गंगे! गंगा-स्तुति बड़ सुख सार पाओल तुअ तीरे| छोड़इत निकट नयन बह नीरे|| कर जोरि विनमओं विमल तरंगे| पुन दरसन होए पुन मति गंगे|| एक अपराध छेमब मोर जानी| परसल पाय पारू तुअ पानी|| कि करब जप-तप जोग ध्येआने| जनम कृतारथ एकहि सनाने|| भनई विद्यापति समदओं तोही| अन्त काल जनु विसरहु मोहि||

शनिवार, 15 अक्टूबर 2016

बिहारी ही बिहार का करेंगे विकास


 Ankit k Verma(Author @ PatnaBeats)





बिहार का विकास बिहारियों के द्वारा ही हो सकता है। आपकी देखभाल अन्य कोई व्यक्ति नहीं कर सकता है क्योंकि उनमें से प्रत्येक के अपने हित हैं। यदि आप अपने हित की रक्षा नहीं करेंगे तो आपके बचाव के लिये कोई भी आगे नहीं आएगा। अतः बिहार को बिहारियों के द्वारा ही सहायता प्राप्त हो सकती हैं और उन्ही के द्वारा इसका विकास हो सकता है। बिहार के किसानों को अन्य किसानों की तुलना में कम मूल्य मिलते हैं क्योकि बिहार के किसानों की अपेक्षा बिचौलियों के पास उन्नत वैज्ञानिक तरीके उपलब्ध हैँ। हमें इसपर ध्यान देना चाहिए। हमें पारदर्शी बनना चाहिए। किसी भी प्रकार से केवल आलोचना ही करने के अवसर नहीं खोजने चाहिए। हमें सकरात्मक रवैया अपनाना चाहिये। प्रयास यह होना चाहिए की कुछ आच्छा हो। साथ ही यह देखना उचित होगा की निकट भविष्य में बिहार क्या प्रगति कर सकता है अथवा की क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यक्त है। बिहार में जो लोग ऊँचे ओहदों पर काम कर रहे हैं, जिनकी आवाज़ सुनी जाती है, अगर वे बिहार की सही तस्वीर पेश करेंगे तो बिहार एक शानदार भविष्य की तरफ अग्रसर होगा। बिहार की इस दशा के लिए हम सभी जिम्मेदार है। हर एक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी दूसरे पर थोप रहा है की साहब , हम तो ठीक हैं लेकिन नौकरशाही ही ठीक नहीं है। नौकरशाही कहती है की मैं तो ठीक ठाक से काम करना चाहती हूँ लेकिन राज्य सरकार की निति ठीक नहीं है। इसी तरह जो प्रबुद्ध जन हैं वे कहते हैं की हम क्या करे , अनपढ़ लोग सत्ता में चले जाते हैं। उसी तरह पत्रकार कहते है की जो घटनाये घटती हैं उसी को हम लिखते हैं। मेरा कहना यह है की जो व्यक्ति जिस क्षेत्र में लगा हुआ है, उसको अपनी जिम्मेदारी का बोध हो जाये, अपनी जिम्मेदारी दूसरे पे ना थोपे तभी बिहार का विकास हो सकता हैं।

कविता भक्ति की लिखूँ या श्रृंगार की | एक कविता बिहार से

भारत के राष्ट्रकवि होने का दर्ज़ा जिन्हें प्राप्त है, अर्थात् श्री रामधारी सिंह दिनकर जी का जन्मदिन 23 सितम्बर को है| 1908 ई० में जन्में श्री दिनकर को याद करते हुए पटनाबीट्स की एक कविता बिहार से में आज शामिल हो रही है उनकी लिखी एक बेहद दुर्लभ कविता|
जी हाँ! 1970-71 ई० में एक कॉलेज पत्रिका में छपी रामधारी सिंह दिनकर जी की ये कविता कॉलेज के छात्र-छात्राओं या शायद अगली पीढ़ी को ध्यान में रख कर लिखी गई होगी| यह कविता एक कवि का दर्द बयाँ करती है, साथ ही ये एक संदेश भी है उनकी तरफ से हम सबके लिए| तो पेश है आज की ‘एक कविता बिहार से’|

“हम रोमांटिक थे, हवा में महल बनाया करते थे,
चाँद के पास हमने नीड़ बसाया था,
मन बहलाने को हम उसमें आया-जाया करते थे|

लेकिन तुम हमसे ज्यादा होशियार होना,
कविता पढ़ने में समय मत खोना,
पढ़ना ही है तो बजट के आँकड़े पढ़ो,
वे ज्यादा सच्चे और ठोस होते हैं|

सांख्यिकी बढ़ती पर है,
दर्शन की शिखा मंद हुई जाती है,
हवा में बीज बोने वाले हँसी के पात्र हैं,
कवि और रहस्यवादी होने की राह बंद हुई जाती है|

कविता भक्ति की लिखूँ या श्रृंगार की,
सविता एक ही है, जो शब्दों में जलता है|”

शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2016

Photos from the Sky | Bird’s Eye View of Patna by Saurav Anuraj


Patna: The honking chaos of the city, surrounded by bustling streets and crowded alleys teeming with people, hand-pulled carts and cycle/motorised rickshaws spewing exhaust, are common in the fast developing city of Patna. Its fascinating to see how every individual working for a better tomorrow is just an individual if is alone but forms the entire city when combined together. Kishanpur Baikunh presents a bird’s eye view of Patna from the lenses of PatnaBeats very own exquisite photographer, Saurav Anuraj.

गुरुवार, 6 अक्टूबर 2016

इन 9 लोगों ने साबित कर दिया कि सफलता अंग्रेज़ी की नहीं, आपकी प्रतिभा की मोहताज़


एक छोटे शहर में रह कर, सामान्य स्कूल से पढ़ने के बाद जब आगे की पढ़ाई या नौकरी के लिए किसी बड़े शहर पहुंचते हैं, तो दो चुनौतियां सामने आती हैं. एक उस शहर का लाइफ स्टाइल और दूसरी अंग्रेज़ी. पिछले कई सालों में लोगों में ये धारणा बनी हुई है कि अंग्रेज़ी मतलब तरक्की, कॉन्फिडेंस या टैलेंट. अंग्रेज़ी नहीं आती तो मतलब ना आपके पास कॉन्फिडेंस है, न ही आप टैलेंन्टेड हैं. मगर रुकिए: ये बताइए कि क्या बल्ले पर आने वाली बॉल आपकी इंग्लिश सुन कर बाउंड्री पार जाती है? या पेंटिंग करते वक्त रंग आपकी अंग्रेज़ी सुन कर कैनवस पर चढ़ते हैं? नहीं न! ये अंग्रेज़ी की प्रॉब्लम नहीं है, आपकी सोच की प्रॉब्लम है. विश्वास मानिए कोई भाषा आपकी हिम्मत से बड़ी नहीं होती, जो आपकी तरक्की के आड़े आ जाए. टैलेंट की कोई भाषा नहीं होती दोस्त, भाषा महज़ संचार का एक ज़रिया होती है. अगर आप अभी भी सोचते हैं कि अंग्रेज़ी न आना आपकी तरक्की रोक सकती है, तो इन लोगों से मिल लीजिए. इन्होंने ये साबित कर दिया कि भाषा से नहीं, इंसान टैलेंट और मेहनत से आगे बढ़ता है. 1. कपिल शर्मा अमृतसर के रहने वाले कपिल शर्मा को आज लगभग हर भारतीय जानता है. कपिल पिछले कई सालों से कई कॉमेडी शो करते आए हैं और अब खुद का शो चला रहे हैं. इनका अपना प्रोडक्शन हाउस है और एक फिल्म भी कर चुके हैं. कपिल की अंग्रेज़ी कमज़ोर है, जिसको उन्होंने अपनी ताकत बना लिया. कपिल अपनी खराब अंग्रेज़ी से भी लोगों को हंसाते हैं. 2. दिलजीत दोसांझ दिलजीत के गानों का बोलबाला पंजाब के साथ पूरे देश में है. हाल ही में फिल्म 'उड़ता पंजाब' के साथ दिलजीत ने ​फिल्मी डेब्यू भी कर लिया. दिलजीत की अंग्रेज़ी भाषा में पकड़ अच्छी नहीं है. वो लोगों से पंजाबी में ही बात करना पसंद करते हैं और उन्हें उस पर फक्र है. दिलजीत ने एक इंटरव्यू में ये बात कही है कि 'जब कोई मुझसे अंग्रेज़ी में बात करता है तो मैं नर्वस हो जाता हूं, पर इसका मेरी तरक्की से कोई लेना-देना नहीं है'. 3. नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी गैंग्स आॅफ वासेपुर रिलीज़ होने के पहले अगर आप और मैं नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी को देखते, तो शायद ये कभी न कह पाते कि आगे चल कर इसकी एक्टिंग की तूती बोलेगी. नवाज़ुद्दीन ने अपने अभिनय से ये साबित कर दिया कि मुख्य किरदार में रहने के लिए ज़रूरी नहीं है कि आपकी लम्बाई 6 फीट हो, आपका चेहरा हीरो जैसा हो या आप अंग्रेज़ी बोल सकें. नवाज़ ने बताया कि मैं इंग्लिश बिलकुल नहीं बोलता. बतौर अभिनेता मेरा काम अपने किरदार को अच्छे से निभाना है. अगर मुझे अंग्रेज़ी के डायलॉग मिलते भी हैं तो मैं उसे याद कर लेता हूं और बोल देता हूं. 4. कपिल देव भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव का हाथ भी अंग्रेज़ी में तंग है. वैसे अंग्रेज़ी का क्रिकेट से कोई लेना देना नहीं है, फिर ​भी कपिल कप्तान थे और उन्हें कई देशों में अंग्रेज़ी में इंटरव्यू देना होता था. कई बार उन्हें ये कमेंट भी सुनने को मिला कि भारतीय टीम के कप्तान को अंग्रेज़ी नहीं आती. इसके बाद कपिल ने अंग्रेज़ी सीखी और उसके बाद 'Rapidex English Speaking Course' के ब्रांड एम्बेसडर भी बने. 5. राखी सावंत राखी को आपने कई बार टीवी पर बोलते सुना होगा. हो सकता है राखी की टूटी-फूटी अंग्रेज़ी पर आप हंसे भी हों. भले ही राखी अपने ऊटपटांग डायलॉगबाज़ी के ​लिए जानी जाती हों, लेकिन उन्होंने तरक्की अपने डांस की वजह से ही पाई है. 6. नरेन्द्र मोदी हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी हिन्दी भाषी हैं. मोदी जी ने हिन्दी और गुजराती में पढ़ाई की है. इस औहदे पर बैठने के बाद भी उन्हें अंग्रेज़ी न आने का अफ़सोस नहीं हुआ. मोदी अपने अधिकतर भाषण हिन्दी में ही देते हैं. कई बार अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भी उन्होंने अपने भाषण फक्र के साथ हिन्दी में ही दिए हैं. 7. कंगना रणावत बॉलीवुड की कुछ बेहतरीन अभिनेत्रियों में से एक, कंगना ने अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया है. कंगना ने खुद बताया कि जब वो इंडस्ट्री में आई थीं वो ठीक से इग्लिश भी नहीं बोल पाती थीं. कई बार लोगों ने उनके अंग्रेज़ी बोलने के तरीके का मज़ाक बनाया, पर वो इस बात से निराश नहीं हुईं. 'Tanu Weds Manu' की कानपुर की लड़की हो या 'Queen', दोनों फिल्मों में जनता ने कंगना के अभिनय पर तालियां बजाई हैं. कंगना ने अपनी अंग्रेज़ी सुधारी है पर उन्हें सफलता उनकी प्रतिभा की वजह से मिली है. 8. हरभजन सिंह हरभजन सिंह ने अपने एक इंटरव्यू में बताया कि जब उन्हें मैच के लिए पहली बार इंग्लैंड जाना था तब वो ये सोच कर घबरा गए थे कि वे लोगों से कैसे बात करेंगे, क्योंकि उन्हें बिलकुल अंग्रेज़ी नहीं आती. उसके बाद उन्होंने भाषा पर ध्यान देना छोड़ दिया और अपने खेल पर फोकस करना शुरू कर दिया. 9. ज़ाकिर खान LifeCelebs Oct 05, 2016 at 19:05 इन 9 लोगों ने साबित कर दिया कि सफलता अंग्रेज़ी की नहीं, आपकी प्रतिभा की मोहताज़ है by Pratyush एक छोटे शहर में रह कर, सामान्य स्कूल से पढ़ने के बाद जब आगे की पढ़ाई या नौकरी के लिए किसी बड़े शहर पहुंचते हैं, तो दो चुनौतियां सामने आती हैं. एक उस शहर का लाइफ स्टाइल और दूसरी अंग्रेज़ी. पिछले कई सालों में लोगों में ये धारणा बनी हुई है कि अंग्रेज़ी मतलब तरक्की, कॉन्फिडेंस या टैलेंट. अंग्रेज़ी नहीं आती तो मतलब ना आपके पास कॉन्फिडेंस है, न ही आप टैलेंन्टेड हैं. मगर रुकिए: ये बताइए कि क्या बल्ले पर आने वाली बॉल आपकी इंग्लिश सुन कर बाउंड्री पार जाती है? या पेंटिंग करते वक्त रंग आपकी अंग्रेज़ी सुन कर कैनवस पर चढ़ते हैं? नहीं न! ये अंग्रेज़ी की प्रॉब्लम नहीं है, आपकी सोच की प्रॉब्लम है. विश्वास मानिए कोई भाषा आपकी हिम्मत से बड़ी नहीं होती, जो आपकी तरक्की के आड़े आ जाए. टैलेंट की कोई भाषा नहीं होती दोस्त, भाषा महज़ संचार का एक ज़रिया होती है. अगर आप अभी भी सोचते हैं कि अंग्रेज़ी न आना आपकी तरक्की रोक सकती है, तो इन लोगों से मिल लीजिए. इन्होंने ये साबित कर दिया कि भाषा से नहीं, इंसान टैलेंट और मेहनत से आगे बढ़ता है. 1. कपिल शर्मा Source- Firstpost अमृतसर के रहने वाले कपिल शर्मा को आज लगभग हर भारतीय जानता है. कपिल पिछले कई सालों से कई कॉमेडी शो करते आए हैं और अब खुद का शो चला रहे हैं. इनका अपना प्रोडक्शन हाउस है और एक फिल्म भी कर चुके हैं. कपिल की अंग्रेज़ी कमज़ोर है, जिसको उन्होंने अपनी ताकत बना लिया. कपिल अपनी खराब अंग्रेज़ी से भी लोगों को हंसाते हैं. 2. दिलजीत दोसांझ Source- Miss Malini दिलजीत के गानों का बोलबाला पंजाब के साथ पूरे देश में है. हाल ही में फिल्म 'उड़ता पंजाब' के साथ दिलजीत ने ​फिल्मी डेब्यू भी कर लिया. दिलजीत की अंग्रेज़ी भाषा में पकड़ अच्छी नहीं है. वो लोगों से पंजाबी में ही बात करना पसंद करते हैं और उन्हें उस पर फक्र है. दिलजीत ने एक इंटरव्यू में ये बात कही है कि 'जब कोई मुझसे अंग्रेज़ी में बात करता है तो मैं नर्वस हो जाता हूं, पर इसका मेरी तरक्की से कोई लेना-देना नहीं है'. 3. नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी Source- Hindustan Times गैंग्स आॅफ वासेपुर रिलीज़ होने के पहले अगर आप और मैं नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी को देखते, तो शायद ये कभी न कह पाते कि आगे चल कर इसकी एक्टिंग की तूती बोलेगी. नवाज़ुद्दीन ने अपने अभिनय से ये साबित कर दिया कि मुख्य किरदार में रहने के लिए ज़रूरी नहीं है कि आपकी लम्बाई 6 फीट हो, आपका चेहरा हीरो जैसा हो या आप अंग्रेज़ी बोल सकें. नवाज़ ने बताया कि मैं इंग्लिश बिलकुल नहीं बोलता. बतौर अभिनेता मेरा काम अपने किरदार को अच्छे से निभाना है. अगर मुझे अंग्रेज़ी के डायलॉग मिलते भी हैं तो मैं उसे याद कर लेता हूं और बोल देता हूं. 4. कपिल देव Source- Indiatoday भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव का हाथ भी अंग्रेज़ी में तंग है. वैसे अंग्रेज़ी का क्रिकेट से कोई लेना देना नहीं है, फिर ​भी कपिल कप्तान थे और उन्हें कई देशों में अंग्रेज़ी में इंटरव्यू देना होता था. कई बार उन्हें ये कमेंट भी सुनने को मिला कि भारतीय टीम के कप्तान को अंग्रेज़ी नहीं आती. इसके बाद कपिल ने अंग्रेज़ी सीखी और उसके बाद 'Rapidex English Speaking Course' के ब्रांड एम्बेसडर भी बने. 5. राखी सावंत Source- Indianexpress राखी को आपने कई बार टीवी पर बोलते सुना होगा. हो सकता है राखी की टूटी-फूटी अंग्रेज़ी पर आप हंसे भी हों. भले ही राखी अपने ऊटपटांग डायलॉगबाज़ी के ​लिए जानी जाती हों, लेकिन उन्होंने तरक्की अपने डांस की वजह से ही पाई है. 6. नरेन्द्र मोदी Source- Ibnlive हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी हिन्दी भाषी हैं. मोदी जी ने हिन्दी और गुजराती में पढ़ाई की है. इस औहदे पर बैठने के बाद भी उन्हें अंग्रेज़ी न आने का अफ़सोस नहीं हुआ. मोदी अपने अधिकतर भाषण हिन्दी में ही देते हैं. कई बार अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भी उन्होंने अपने भाषण फक्र के साथ हिन्दी में ही दिए हैं. 7. कंगना रणावत Source- Midday बॉलीवुड की कुछ बेहतरीन अभिनेत्रियों में से एक, कंगना ने अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया है. कंगना ने खुद बताया कि जब वो इंडस्ट्री में आई थीं वो ठीक से इग्लिश भी नहीं बोल पाती थीं. कई बार लोगों ने उनके अंग्रेज़ी बोलने के तरीके का मज़ाक बनाया, पर वो इस बात से निराश नहीं हुईं. 'Tanu Weds Manu' की कानपुर की लड़की हो या 'Queen', दोनों फिल्मों में जनता ने कंगना के अभिनय पर तालियां बजाई हैं. कंगना ने अपनी अंग्रेज़ी सुधारी है पर उन्हें सफलता उनकी प्रतिभा की वजह से मिली है. 8. हरभजन सिंह Source- Wikimedia हरभजन सिंह ने अपने एक इंटरव्यू में बताया कि जब उन्हें मैच के लिए पहली बार इंग्लैंड जाना था तब वो ये सोच कर घबरा गए थे कि वे लोगों से कैसे बात करेंगे, क्योंकि उन्हें बिलकुल अंग्रेज़ी नहीं आती. उसके बाद उन्होंने भाषा पर ध्यान देना छोड़ दिया और अपने खेल पर फोकस करना शुरू कर दिया. 9. ज़ाकिर खान Source- Wikimedia पिछले कई सालों से इंटरनेट पर या यूं कहें कि Youtube पर Stand Up Comedy के नाम पर कई कॉमेडियन अंग्रेज़ी में ही लोगों को हंसाते दिखते आए हैं. चाहे वो AIB Roast हो, Laughing Canvas Club हो या East India Comedy के स्टेज शोज़, ज़्यादातर कॉमेडियन इंग्लिश में ही शो करते हैं. इन सब के बीच एक नया चेहरा Youtube की Suggested Videos में दिख रहा है. ये कॉमेडियन है ज़ाकिर खान. ज़ाकिर हिन्दी में ही शो करते हैं, AIB Diwas पर इनका शो सुपरहिट रहा. ग़ज़बPost से बातचीत में ज़ाकिर ने बताया कि- हर चीज़ का वक्त आता है. Youtube पर अंग्रेज़ी कॉमेडियन को देख कर अगर मैं भी इं​ग्लिश में शो करने की कोशिश करता तो शायद इतना सफल न होता. मैंने हिन्दी का साथ नहीं छोड़ा और देखिए लोगों ने इसे भी स्वीकारा है. लोग आपकी सोच देखते हैं, भाषा नहीं! Got It Bro!

मन की बात | अमन आकाश

थोरा सा शमय निकाल कर इसको परिए..😃 हाँ ठीक है हम बिहारी हैं.. बचपने से अइसे इस्कूल में पढ़े हैं, जहाँ बदमाशी करने पर माट साब "ठोठरी प...