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संजय कुमार शांडिल्य की कविता संग्रह ‘आवाज भी देह है’ को बोधि प्रकाशन ने प्रकाशित किया तथा उन्हें जयपुर में दीपक अरोड़ा स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया। संजय औरंगाबाद दाउदनगर महाविद्यालय से सेवारत अध्यापक एस के शांडिल्य और अंकोढा मिडिल स्कूल में कर्यरत शिक्षिका मांडवी पांडेय के बडे पुत्र हैं। संजय अपने स्कूली जीवन से ही कविता लिखा करते थे। दाउदनगर के विवेकानंद मिशन स्कूल से शिक्षक के रुप में उन्होंने अपने कैरियर की शुरुवात की और अभी गोपालगंज सैनिक स्कूल में राजनीतिक शास्त्र शिक्षक के रुप में कार्यरत हैं। बिहारगीत भी उन्होंने ही लिखा था जिसके लिए राज्य सरकार ने उन्हें सम्मानित भी किया था। बोधि पुस्तक पर्व के चौथे सेट की दस और दीपक अरोड़ा स्मृति पांडुलिपि प्रकाशन योजना के तहत प्रकाशित पांच पुस्तकों का लोकार्पण पिछले सोमवार (दिनांक ०७ नवम्बर २०१६ ) की शाम पिंकसिटी प्रेस क्लब, जयपुर के सभागार में हुआ।
संजय कुमार शांडिल्य की कविता संग्रह ‘आवाज भी देह है’ को बोधि प्रकाशन ने प्रकाशित किया तथा उन्हें जयपुर में दीपक अरोड़ा स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया। संजय औरंगाबाद दाउदनगर महाविद्यालय से सेवारत अध्यापक एस के शांडिल्य और अंकोढा मिडिल स्कूल में कर्यरत शिक्षिका मांडवी पांडेय के बडे पुत्र हैं। संजय अपने स्कूली जीवन से ही कविता लिखा करते थे। दाउदनगर के विवेकानंद मिशन स्कूल से शिक्षक के रुप में उन्होंने अपने कैरियर की शुरुवात की और अभी गोपालगंज सैनिक स्कूल में राजनीतिक शास्त्र शिक्षक के रुप में कार्यरत हैं। बिहारगीत भी उन्होंने ही लिखा था जिसके लिए राज्य सरकार ने उन्हें सम्मानित भी किया था। बोधि पुस्तक पर्व के चौथे सेट की दस और दीपक अरोड़ा स्मृति पांडुलिपि प्रकाशन योजना के तहत प्रकाशित पांच पुस्तकों का लोकार्पण पिछले सोमवार (दिनांक ०७ नवम्बर २०१६ ) की शाम पिंकसिटी प्रेस क्लब, जयपुर के सभागार में हुआ।
कहते हैं की भारत की आत्मा हमारे गॉवों में बसती है , आज के माहौल में जहाँ नारीवाद का विष्कृत रूप दिखने को मिलता है , वहाँ हमे आइना दिखाती हुई संजय कुमारशांडिल्य की एक कविता बिहार से में यह कविता –

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