गाँव-घर से मिलल संस्कार कहाँ जाई,मनवा में बसल ई बिहार कहाँ जाई|दुई-चार दिन तनी घरहूँ बितईहऽ,इहवाँ के खुसबू पूरा देस में फइलइहऽ|माटी के दीहल अधिकार कहाँ जाई,मनवा में बसल ई बिहार कहाँ जाई|जाई के बिदेस, देस के बोली जनि भुलइहऽ,लईकन के माई-बाबू कहे के सिखइहऽ|जरि जाई देंहिया बाकिर बेवहार कहाँ जाई,मनवा में बसल ई बिहार कहाँ जाई|गंगा के घाट, गुल्ली-डंटा के खेला,हर साल लागे इंहा सोनपुर मेला|एह सभ में रमल तोहार पेयार कहाँ जाई,मनवा में बसल ई बिहार कहाँ जाई|सिंगापूर-अमेरिका में छठी माई के पूजन,एके साथे होखे कुआरे पितरि अरपन|एहिजा के तीज-त्योहार कहाँ जाई,मनवा में बसल ई बिहार कहाँ जाई|नस-नस में रसल बिचार कहाँ जाई,मनवा में बसल ई बिहार कहाँ जाई||
शनिवार, 22 अक्टूबर 2016
बिहार के इस बेटी और प्रसिद्ध कवियित्री के मन में बसल बा बिहार !
रविवार, 16 अक्टूबर 2016
खुशखबरी: मिथिलांचल के इन जिलों में बिछेगा सड़कों का जाल, क्षेत्र के विकास को लगेंगे पंख
मिथिलांचल के पांच जिलों में सड़कों का जाल बिछाया जायेगा. मधुबनी, दरभंगा, सुपौल, सहरसा और समस्तीपुर होते हुए राजधानी पहुंचने वाली सड़कों को 10 मीटर तक विस्तार किया जायेगा. सड़क, परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने मिथिलांचल के तीन सड़कों का विस्तार करने के लिए निर्णय लिया है. मंत्रालय ने एनएच 327 ए का विस्तार करने के लिए स्वीकृति दी है. सुपौल जिले के सरायगढ़, लालगंज व गनपतगंज सड़क का विस्तार होगा.
रोसड़ा से बहेड़ी, बहेड़ा, होते हुए यह सड़क मधुबनी जिले से जुड़ेगी. मधुबनी जिले के उच्चैठ भगवती स्थान बासोपट्टी से बेनीपट्टी, रहिका, मधुबनी, रामपट्टी, अवाम, लोफा, भेजा को सहरसा जिले के महिषी, तारा स्थान, बनगांव, बरियाही व सहरसा से जोड़ा जायेगा. मिथिलांचल के 90 किलोमीटर सड़क को दस मीटर चौड़ा किया जायेगा. सड़क का निर्माण ईपीसी मोड में होगा. वर्तमान में यह सड़क कहीं साढ़े तीन, साढ़े पांच व सात मीटर चौड़ी है. सड़क विस्तार होने से दरभंगा व सहरसा के बीच दूरी कम होने के साथ मिथिलांचल के तीन जिले मधुबनी, सुपौल व सहरसा में आवागमन में सहूलियत होगी. मंत्रालय ने स्टेट हाइवे को नेशनल हाइवे में सैद्धांतिक स्वीकृति दी है. इसके बाद उसका डीपीआर तैयार कराया जा रहा है. इसके लिए कंसलटेंट बहाल होगा. जानकारों के अनुसार अगले साल मार्च तक सड़क का डीपीआर तैयार होगा. इसके बाद सड़क के दस मीटर चौड़ा होने के निर्माण को लेकर टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी. सड़क का विस्तार होने से अन्य सड़कों के साथ कनेक्टिविटी बढ़ेगी. सड़क का विस्तार होने से लोगों की सुविधा बढ़ेगी. वहीं रोजगार के साथ व्यापार भी बढ़ेगा साथ ही सड़क का विस्तार होने से मिथिलांचल क्षेत्र की कनेक्टिविटी अन्य जगहों के साथ बढ़ेगी. मिथिलांचल में अभी मुख्य सड़क एनएच 57 फोर लेन है. दरभंगा, मधुबनी, सुपौल होते हुए फोर लेन पूर्णिया तक जाती है. सड़क का विस्तार होने से एनएच 106 बीरपुर से बीहपुर के अलावा एनएच 107 महेशखूंट से पूर्णिया से कनेक्टिविटी बढ़ेगी. दरभंगा से सहरसा की दूरी लगभग 60 किलोमीटर कम होगी. इसके साथ ही एनएच 28 में ताजपुर-बख्तियारपुर पुल निर्माण होने पर दक्षिण बिहार आने में सुविधा बढ़ेगी.
बड़ सुख सार पाओल तुअ तीरे | एक कविता बिहार से
शनिवार, 15 अक्टूबर 2016
बिहारी ही बिहार का करेंगे विकास
Ankit k Verma(Author @ PatnaBeats)
बिहार का विकास बिहारियों के द्वारा ही हो सकता है। आपकी देखभाल अन्य कोई व्यक्ति नहीं कर सकता है क्योंकि उनमें से प्रत्येक के अपने हित हैं। यदि आप अपने हित की रक्षा नहीं करेंगे तो आपके बचाव के लिये कोई भी आगे नहीं आएगा। अतः बिहार को बिहारियों के द्वारा ही सहायता प्राप्त हो सकती हैं और उन्ही के द्वारा इसका विकास हो सकता है। बिहार के किसानों को अन्य किसानों की तुलना में कम मूल्य मिलते हैं क्योकि बिहार के किसानों की अपेक्षा बिचौलियों के पास उन्नत वैज्ञानिक तरीके उपलब्ध हैँ। हमें इसपर ध्यान देना चाहिए। हमें पारदर्शी बनना चाहिए। किसी भी प्रकार से केवल आलोचना ही करने के अवसर नहीं खोजने चाहिए। हमें सकरात्मक रवैया अपनाना चाहिये। प्रयास यह होना चाहिए की कुछ आच्छा हो। साथ ही यह देखना उचित होगा की निकट भविष्य में बिहार क्या प्रगति कर सकता है अथवा की क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यक्त है। बिहार में जो लोग ऊँचे ओहदों पर काम कर रहे हैं, जिनकी आवाज़ सुनी जाती है, अगर वे बिहार की सही तस्वीर पेश करेंगे तो बिहार एक शानदार भविष्य की तरफ अग्रसर होगा। बिहार की इस दशा के लिए हम सभी जिम्मेदार है। हर एक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी दूसरे पर थोप रहा है की साहब , हम तो ठीक हैं लेकिन नौकरशाही ही ठीक नहीं है। नौकरशाही कहती है की मैं तो ठीक ठाक से काम करना चाहती हूँ लेकिन राज्य सरकार की निति ठीक नहीं है। इसी तरह जो प्रबुद्ध जन हैं वे कहते हैं की हम क्या करे , अनपढ़ लोग सत्ता में चले जाते हैं। उसी तरह पत्रकार कहते है की जो घटनाये घटती हैं उसी को हम लिखते हैं। मेरा कहना यह है की जो व्यक्ति जिस क्षेत्र में लगा हुआ है, उसको अपनी जिम्मेदारी का बोध हो जाये, अपनी जिम्मेदारी दूसरे पे ना थोपे तभी बिहार का विकास हो सकता हैं।
कविता भक्ति की लिखूँ या श्रृंगार की | एक कविता बिहार से
भारत के राष्ट्रकवि होने का दर्ज़ा जिन्हें प्राप्त है, अर्थात् श्री रामधारी सिंह दिनकर जी का जन्मदिन 23 सितम्बर को है| 1908 ई० में जन्में श्री दिनकर को याद करते हुए पटनाबीट्स की एक कविता बिहार से में आज शामिल हो रही है उनकी लिखी एक बेहद दुर्लभ कविता|
जी हाँ! 1970-71 ई० में एक कॉलेज पत्रिका में छपी रामधारी सिंह दिनकर जी की ये कविता कॉलेज के छात्र-छात्राओं या शायद अगली पीढ़ी को ध्यान में रख कर लिखी गई होगी| यह कविता एक कवि का दर्द बयाँ करती है, साथ ही ये एक संदेश भी है उनकी तरफ से हम सबके लिए| तो पेश है आज की ‘एक कविता बिहार से’|
“हम रोमांटिक थे, हवा में महल बनाया करते थे,
चाँद के पास हमने नीड़ बसाया था,
मन बहलाने को हम उसमें आया-जाया करते थे|
लेकिन तुम हमसे ज्यादा होशियार होना,
कविता पढ़ने में समय मत खोना,
पढ़ना ही है तो बजट के आँकड़े पढ़ो,
वे ज्यादा सच्चे और ठोस होते हैं|
सांख्यिकी बढ़ती पर है,
दर्शन की शिखा मंद हुई जाती है,
हवा में बीज बोने वाले हँसी के पात्र हैं,
कवि और रहस्यवादी होने की राह बंद हुई जाती है|
कविता भक्ति की लिखूँ या श्रृंगार की,
सविता एक ही है, जो शब्दों में जलता है|”
शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2016
Photos from the Sky | Bird’s Eye View of Patna by Saurav Anuraj







गुरुवार, 6 अक्टूबर 2016
इन 9 लोगों ने साबित कर दिया कि सफलता अंग्रेज़ी की नहीं, आपकी प्रतिभा की मोहताज़
मन की बात | अमन आकाश
थोरा सा शमय निकाल कर इसको परिए..😃 हाँ ठीक है हम बिहारी हैं.. बचपने से अइसे इस्कूल में पढ़े हैं, जहाँ बदमाशी करने पर माट साब "ठोठरी प...
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माँ तेरी निर्मलता की दरकार तो है कब तक टालेंगे, कि सरकार तो है! माँ गंगा की पवित्रता आज भी हर धर्म के लिए...
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त्योहारों और पर्वों के देश भारत में हर उत्सव को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. साल का ऐसा कोई महीना नहीं , जिसका अंत किसी बड़े व्रत और त्यो...
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