शनिवार, 21 अक्टूबर 2017

इस बार छठ छूट न पाए | अपनी परंपरा बचाये रखने की सीख देता ये वीडियो “कबहू ना छूटी छठ”

दिवाली की रात के बाद की ही सुबह से हवाओं में हल्की ठण्ड के साथ छठ की आहट आने लगती है। चारो ओर की चहल पहल इस महापर्व के नज़दीक आने का इशारा करने लगती है। लोगों में तो उत्साह और हर्षोल्लास की लहर होती ही है इसके साथ साथ मौसम भी एक सुहानी अंगड़ाई ले कर मानो छठ का स्वागत कर रहा होता है। ऐसे ही माहौल को और छठमय बनाने नितिन चंद्रा और उनकी निओ बिहार की टीम पिछले साल के जैसे इस बार भी छठ के उपलक्ष्य में छठ का एक नया वीडियो ले के आये हैं।
“कबहू ना छूटी छठ”, ये नाम है इस गाने का। क्रांति प्रकाश झा और क्रिस्टीन ज़ेडएक ने इस बार भी अपने अभिनय से मन मोह लिया है। इस गाने में चार चाँद लगाया है हिंदी और भोजपुरी संगीत की दो महान आवाज़ें अल्का याग्निक और भरत शर्मा व्यास ने। छठ के कालजयी गानों की लड़ी में इस गाने ने एक और कड़ी जोड़ दी है।
इस गाने में बात की गयी है हमारी इस परंपरा को ख़त्म न होने देने की। आज के दौर में जहाँ लोगों की प्राथमिकतायें कृत्रिम और अपनी जड़ों से दूर करने वाली चीज़ों की तरफ मुड़ गयी है वहाँ ज़रूरत है कि अपनी मिट्टी की ख़ुश्बू देने वाली इस विरासत को हम सहेज के रखें। वो बात जो इस त्यौहार को इतना ख़ास बनाता है वो ये है कि इसमें अमीरी-गरीबी, जाति-धर्म, पुरुष- महिला का भेद नहीं होता है। बिहार और हमारे पुरे देश को इस से बेहतर सन्देश देने वाला दूसरा त्यौहार शायद ही कोई हो। ये एक तरह से बुनियाद है हमारे व्यक्तिगत आदर्शों और उस आदर्श समाज की जिसकी हम कामना करते हैं। इन सब को ध्यान में रखते हुए ये सुनिश्चित करना ज़रूरी हो जाता है कि वक़्त के साथ आगे बढ़ने की होड़ में छठ पीछे ना छूट जाये।

तो हम सबको ये ध्यान रखना होगा कि हम अपनी इस विरासत को अपनी ज़िन्दगी में अहमियत दें। जो घर से दूर हैं उनको ये छठ घर बुलाती है। और अगर घर न भी आ पाएं तो जहाँ भी हों इस छठ की भावना को दिल में बचाये रखें।

लेख साभार - PatnaBeats
वीडियो साभार - NeoBihar

मंगलवार, 10 अक्टूबर 2017

पलट तेरा ध्यान किधर है : नया पोस्ट इधर है



पलट तेरा ध्यान किधर है यूट्यूब पर एक चैनल आजकल धमाल मचा रहा है जिसके एंकर है हमारे अपने,हमारे बीच,हमारे भाई साहिल चंदेल यूट्यूब की दुनिया में साहिल चंदेल या पलट तेरा ध्यान किधर है कोई ज्यादा पुराना नाम नहीं है बस कुछ दिन पहले आया और लोगो के दिल पर राज करने लगे लगा आज इनके चैनल पर 1 लाख सब्सक्राइबर पूरे हो गए है तो हम लेकर आए है उनसे ही बातचीत का एक छोटा सा अंश वैसे वास्तव म य छोटा सा अंश नहीं बल्कि छोटी सी बातचीत का बड़ा सा सारांश है क्योंकि आजकल इंडिया में यही चल रहा है छोटी बातो को बड़ा मुद्दा बनाया जाता है।
साहिल से मैंने खुद बात की है लेकिन फेसबुक के माध्यम से सच पूछो तो मै इसे आज तक व्यक्तिगत रूप से मिलवनही पाया लेकिन मिलने का समय जरूर मांग लिया है। अब बात करते है साहिल और इनके चैनल के बारे में साहिल एक मध्यमवर्गीय परिवार से नाता रखते है हो बिहार के समस्तीपुर के एक छोटे से कस्बे वारिसनगर के पास किशनपुर बैकुंठ है और खुशी की बात ये है कि ये हमारा कस्बा है जो कि अपने आप में खुशहाल है। अब बात करते है साहिल और साहिल के कारनामो कि हमारी बात्चीत के आधार पर -

 प्रश्न - तो सबसे पहले हम ये जानना चाहेंगे कि आपने पलट तेरा ध्यान किधर है कि शुरुआत कैसे की?
 उत्तर - कुछ खास नही बस इडिटिन्ग और निर्देशन कि दुनिया मे कुछ खास करने के लिये मैंने इस चैनल की शुरुआत की थी और आज हम अपने सभी सब्सक्राइबर के साथ के बूते ही आज यहाँ हूँ।इन बातों के लिए मैं अपने सभी सब्सक्राइबर को धन्यवाद कहना चाहूंगा।
 प्रश्न - क्या आपने फ़िल्म निर्देशन या एदितिन्ग के क्षेत्र मे शिक्षा प्राप्त कि है?
 उत्तर - नहीं,नहीं यूटुब ही मेरा शिक्षन संस्थान है और मैने यही से डिग्री ली है,यहां मैने काफी लोगो से बहुत कुछ सिखा है।
 प्रश्न - आप ने अपना पहला वीडियो कैसे शूट किया था?
 उत्तर - मैं उस समय गुड़गाव(अब गुरुग्राम) स्थित क्म्पनी मे काम कर रहा था,सुबह के 2 बज रहा था और हमारा सिस्टम काम नहीं कर रहा था उसी समय मैंने अपने दोस्तों को साथ पहली बार शूट किया था,फिर मेरे एक दोस्तो ने मुझे यूट्यूब पर वीडियो अपलोड करने के लिए ।
 वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करे प्रश्न - आप अपना आदर्श किसे मानते है? उत्तर - वैसे तो किसी को भी नही लेकिन मैने भुवन बम(BB Ki Vines) से बहुत कुछ सीखा है,और अकेले ही चल पड़ा हूँ ,जिसमे मेरे साथ लोग जुड़ते गए और आज मैं यहाँ हूँ,ये मेरे साथियो की बदौलत है।

प्रश्न - आपके चंद पसन्दीदा यूटुब चैनल?
उत्तर - वैसे तो मुझे यूट्यूब के लगभग सभी चैनल पसंद करता हूँ लेकिन मेरे कुछ पसंदीदा चैनल है - Film Riot,Sam And Niko,Surface Studio और भी है

प्रश्न - तो अभी आप क्या कर रहे है?

उत्तर - मेरा अपना ओफ़िस है जहां मैं एदितिन्ग का काम करता हूं,मैने दो फुल फ़िल्म भी एडिट किये है जो कि प्यार बनाम खाप पंचायत और कसम हमार माई के है
भाई ने दो फ़िल्म भी एडिट की है जो अभी रिलिज नही और भैया का कहना है कि वो करो जिससे तुम्हे प्यार है,बद्ले मे तुम्हे भी प्यार मिलेगा

सोमवार, 9 अक्टूबर 2017

खुशखबरी: इस कारण गिनीज बुक में दर्ज होने जा रहा है बिहार का मधुबनी रेलवे स्टेशन का नाम


दुनियाभर में बिहार का मधुबनी अपने अनोखे मधुबनी पेंटिंग के लिए प्रसिद्ध है| एक बार फिर मधुबनी अपने इस गौरवपूर्ण विरासत के लिए विश्व फलक पर चमकने के लिए तैयार है| जी हाँ, पूर्व मध्य रेलवे के मधुबनी स्टेशन का नाम जल्द ही गिनीज बुक में दर्ज हो सकता है। इसके लिए यहां दीवारों पर करीब 8000 से अधिक वर्ग फुट में मिथिला पेंटिंग उकेरी जा रही है। किसी भी लोक चित्रकला क्षेत्र में इतने बड़े एरिया में पूरे वर्ल्ड में एक रिकॉर्ड हो सकता है। मधुबनी का रेलवे स्टेशन आपको न केवल मधुबनी पेंटिंग के लिए आकर्षित करेगा, बल्कि इन पेंटिंग के जरिए आप इस क्षेत्र की पुरानी कहानियों और स्थानीय सामाजिक सरोकारों से भी रूबरू हो सकेंगे। मधुबनी रेलवे स्टेशन की दीवारों पर गैर सरकारी संस्था ‘क्राफ्टवाला’ की पहल पर करीब 7,000 वर्गफीट से अधिक क्षेत्रफल में मधुबनी पेंटिंग बनाई जा रही है। इसमें 100 कलाकार अपना श्रमदान कर रहे हैं। इस कार्य में रेलवे भी सहयोग कर रहा है। संस्था के संयोजक और मधुबनी के ठाढ़ी गांव निवासी राकेश कुमार झा ने बताया कि किसी भी क्षेत्र में इतने बड़े क्षेत्रफल में लोक चित्रकला को उकेरा जाना एक रिकॉर्ड हो सकता है। झा ने बताया कि गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में मात्र 4566.1 वर्गफीट में पेंटिंग दर्ज है, जबकि भारत में सबसे बड़ी पेंटिंग का रिकॉर्ड मात्र 720 वर्गफीट का है। तकरीबन आठ हजार वर्ग फुट में कलाकृतियां बनाए जाने का लक्ष्य यहां रेलवे स्टेशन को पूरी तरह मधुबनी पेंटिंग्स से संवरने के बाद इसके विश्व का सबसे बड़ा मधुबनी पेंटिंग्स से सुसज्जित क्षेत्र होने का अनुमान लगया जा रहा है। डीआरएम ने बताया कि प्लेटफार्म सहित स्टेशन परिसर के लगभग आधा किलोमीटर के रेडियस में तकरीबन आठ हजार वर्ग फुट में विभिन्न विषयें पर कलाकृतियां बनाए जाने का लक्ष्य है। इस पेंटिंग को बनाने में करीब 100 से ज्यादा कलाकार जुटे हुए हैं। डीआरएम की मदद से बन रही इस पेंटिंग के लिए कलाकार पूरे जी जान से जुटे हुए हैं। आपको जानकार आश्चर्य होगा कि इतना बड़ी योजना श्रम दान से चलाई जा रही हैं। अगले दो दिनों में ये पेंटिंग पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सात दिनों तक चलने वाले इस पेंटिंग अभियान में पारिश्रमिक के तौर पर कलाकारों को कुछ नहीं मिलेगा। फिर भी पूरे लगन से कलाकार भारत के सबसे गंदे स्टेशन को खूबसूरत बनने में जुटे हुए हैं।

मन की बात | अमन आकाश

थोरा सा शमय निकाल कर इसको परिए..😃 हाँ ठीक है हम बिहारी हैं.. बचपने से अइसे इस्कूल में पढ़े हैं, जहाँ बदमाशी करने पर माट साब "ठोठरी प...